लेकिन
कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था आज की दास्तां हमारी है -गुलजार
Sunday, January 19, 2020
कठिन जीवन के बरक्स
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प्रतीकात्मक चित्र जीवन कभी किसी दौर में 'आसान' नहीं रहा है। न तब का दौर, जब सोशल मीडिया और इंटरनेट नहीं था, आसान था। न अब, जब ...
2 comments:
Wednesday, January 8, 2020
बाजार, किताब और लेखक
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किताबों और लेखकों दोनों की दुनिया बदल चुकी है। किताबें अब भी खूब छप रही हैं। लेखक अब भी खूब लिख रहे हैं। बदलाव बस यह आया है कि दोनों के ब...
Thursday, October 10, 2019
बाजार और त्योहार
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त्योहार सिर पर हैं। ऑनलाइन बाजार तैयार है। सेल लगी हुई है। जमकर डिस्काउंट दिया जा रहा है। टीवी और अखबारों में आने वाला हर विज्ञापन कह रहा...
Friday, October 4, 2019
बेकाबू होता सोशल मीडिया
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सोशल मीडिया (जैसे- फेसबुक, व्हाट्सएप) पर नकेल कसने को कहा है। और, कुछ गलत नहीं कहा है। अब वाकई समय आ गया...
गांधी को याद करने की होड़
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अभी कुछ दिन पहले भगत सिंह को याद कर हम 'मुक्त' हुए ही थे कि अब गांधी को याद करने लग गए। जिधर नजर उठकर देखो उधर ही गांधी को याद कि...
Monday, August 19, 2019
डायरी
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पिछली बरसात में डायरी के कुछ पन्ने गीले हो गए थे पर उस पन्ने को मैंने गीला होने से बचा लिया था जिस पर तुम्हारा नाम दर्ज था
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